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【सिद्धान्त-रिवाईजेशन # 8】'श्रीराधारानी प्राकट्योत्सव विशेष - 1/7'

♻ प्रेम की सर्वोच्च कक्षा कौन सी है और वहाँ कौन विराजमान हैं : माधुर्य भाव में समर्था रति का प्रेम सर्वोच्च होता है. इसमें प्रेम की उच्चतम कक्षा महाभाव भक्ति जीव को प्राप्त होती है. इस महाभाव भक्ति की भी 2 कक्षाएं हैं - मोदन और मादन. मोदन महाभाव श्रीकृष्ण और जीवों तक की पहुँच की सीट है, इसके आगे और अंतिम क्लास है मादन या मादनाख्य महाभाव, यहाँ केवल श्रीकिशोरी राधा जी विराजमान हैं.
♻ श्रीराधा रानी जी की 8 प्रधान अष्टमहासखियाँ कौन-कौन हैं : ललिता, विशाखा, चित्रा, चम्पकलता, सुदेवी, रँगदेवी, तुंगविद्या और इंदुलेखा.
♻ कई छवियों में कृष्ण श्रीराधिका के चरण दबाते हुए दिखाई पड़ते हैं, इसका क्या रहस्य है : श्रीराधिका प्रेम की साक्षात् स्वरुपा हैं, श्रीकृष्ण की आल्हादिनी शक्ति हैं. वे श्रीकृष्ण को नित्य आनंदमय बनाये रखती हैं. भगवान् से भी बड़ा प्रेम है, जो भगवान् को भी अपना दास बना लेती है. उसी प्रेमस्वरुपा कृपालु श्रीराधिका के श्रीकृष्ण भी दास हैं.
♻ श्रीराधा रानी के भोलेपन और सहज कृपालु स्वरूप का कोई उदाहरण प्रस्तुत करें : वे वन में विहार करने वाली अहीर जात की स्त्रियों (गोपियों) को भी अपनी प्राणसखी और सहचरी बनाकर रखती हैं. अपने शरणागत की रक्षा अपनी आँखों की पुतलियों के समान करती हैं और एक करुण पुकार पर ही श्रीकृष्ण तक को छोड़कर शरणागत के पास आकर हृदय से लगा लेती हैं.
♻ 'राधा' नाम की महिमा अनंत है, एक-दो महिमा का वर्णन करें : 'राधे' नाम लेने वाला अनंतकोटि ब्रम्हांडनायक श्रीकृष्ण को भी अपने वश में कर लेता है. यह नाम लेकर करुण क्रन्दन करने वाला अपने अनंत जन्म की बिगड़ी बनाकर सहज ही श्रीकृष्ण प्रेम प्राप्त कर लेता है.
(साधना में लाभ हेतु)
★ श्री कृपालु भक्तिधारा प्रचार समिति

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