🌿।।श्री राधावल्लभो जयति।।🌿 🌿।। श्री हित हरिवंशचन्द्रो जयति।।🌿 🌷 श्री वृंदावन-सत लीला 🌷 क्रमशः से आगे.... 🌿बसिकै वृंदाविपिन में, इतनौ बडौ सयान। जुगल चरण के भजन बिन, निमिष ...
सभी स्नेही मानसप्रेमी साधकजनों को हमारी स्नेहमयी राम राम | जय सियाराम जय सियाराम जय सियाराम जय जय सियाराम श्रीरामचरितमानस– उत्तरकाण्ड दोहा संख्या 129से आगे ..... चौपाई : यह सुभ संभु उमा संबादा। सुख संपादन समन बिषादा।। भव भंजन गंजन संदेहा। जन रंजन सज्जन प्रिय एहा।। राम उपासक जे जग माहीं। एहि सम प्रिय तिन्ह कें कछु नाहीं।। रघुपति कृपाँ जथामति रावा। मैं यह पावन चरित सुहावा।। एहिं कलिकाल न साधन दूजा। जोग जग्य जप तप ब्रत पूजा।। रामहि सुमिरिअ गाइअ रामहि। संतत सुनिअ राम गुन ग्रामहि।। जासु पतित पावन बड़ बाना। गावहिं कबि श्रुति संत पुराना।। ताहि भजहि मन तजि कुटिलाई। राम भजें गति केहिं नहिं पाई।। भावार्थ: शम्भु-उमाका यह कल्याणकारी संवाद सुख उत्पन्न करने वाला और शोक का नाश करनेवाला है। जन्म-मरणका अन्त करने वाला, सन्दहों का नाश करनेवाला, भक्तोंको आनन्द देनेवाला और संत पुरुषोंको प्रिय है।।जगत् में जो (जितने भी) रामोपासक हैं, उनको तो इस राम कथा के समान कुछ भी प्रिय नहीं है। श्रीरघुनाथजीकी कृपासे मैंने यह सुन्दर और पवित्र करनेवाला चरित्र अपनी बुद्धि के अनुसार गाया है।। ...
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राधे राधे ।