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गौदान

राधे राधे शुभ प्रभात
🙏🏻🙏🏻आज की "ब्रज रस धारा"🙏🏻🙏🏻
दिनांक 07/11/2016

गौ हमारी माता है वास्तव में गौ और ब्राह्मण दोनों एक ही कुल के है ब्राह्मणों से यदि वेद मंत्र की स्थिति है तो गौओ से यज्ञ के साधन हविष्य की प्राप्ति होती है.शास्त्रों में गौ दान का बहुत महत्व कहा गया है. तो आईये जाने कब, किस तरह की, गौ दान का फल है.1. -जैसे नदियों में गंगा नदी श्रेष्ठ है, इसी प्रकार गौओ में कपिला गौ उत्तम मानी गई है.जो गौ सीधी हो, दुहने में तंग न करे, जिसका बछड़ा सुन्दर हो, ऐसी गाय का दान करने से, उसके शरीर में जितने रोये होते है उतने वर्षों तक दाता परलोक में सुख भोगता है.2. -बीमार, अंगहीन,बूढी गाय या अन्याय से प्राप्त की हुई गाय का दान नहीं करना चाहिये, स्वयं उसकी सेवा करनी चाहिये.3. -खरीदी हुई, दुग्धवती, दुःख से छुडाई हुई, गौदान करना प्रशसनीय मानी गई है.उभयमुखी धेनु को दान करने का शास्त्रों में बड़ा महत्व है.तुरंत ब्याती हुई गाय को ही"उभयमुखी"गौ कहते है.4. -गौ ब्या रही हो, बछड़े का थोडा-सा भी अंग दिख रहा हो,उस समय वहगौ पृथ्वी रूपा हो जाती है उसका दान करने पर सम्पूर्ण पृथ्वी के दान का फल प्राप्त होता है.वही गाय उभयमुखीकहलाती है.और उस बछड़े और गाय के शरीर में जितने रोयें होते है उतने युगों तक दाता देवलोक में पूजित होता है.5. -ब्राहमण कोसफ़ेद गौदान करने से, मनुष्य ऐश्वर्यशाली होता है.धुएं के समानरंग वाली गौ स्वर्ग प्रदान करने वाली होती है.कपिल गौका दान अक्षय फल देने वाला है,कृष्णगौका दान देकर मनुष्य कभी कष्ट में नहीं पड़ता.भूरे रंगकी गाय दुर्लभ है,गौर रंगवाली गाय कुल को आनंद प्रदान करने वाली होती है मन, वचन, क्रिया, से जो भी पाप बन जाते है, उन सबका कपिला गौ के दान से क्षय हो जाता है.6.- वैतरणी धेनु -कृष्ण वर्ण वाली होती है जब व्यक्ति की मृत्यु होती है तब नीचे से ऊपर जाने के मार्ग मेंवैतरणी नदी मिलती है जो बहुत भयानक होती है.यदि व्यक्ति ने अपने जीवन में गाय को दान किया हो तो उसे नदी को पार करने के लिए वही धेनु मिलती है व्यक्ति उसकी पूंछ पकड़कर आसानी से नदी को पार कर जाता है.7. उत्क्रांति धेनु -यदि किसी व्यक्ति के प्राण निकलते समय बहुत कष्ट हो रहा हो तोउत्क्रांति धेनु का दान यदि उससे कराया जाए तो उसके प्राण निकलने में कष्ट नहीं होता.8. ऋण धेनु -ऋषि ऋण, पितृ ऋण मनुष्य और अन्य ऋण से मुक्त होने के लिए भी मानुष को गाय का दान करना चाहिये.9. पपनोदक धेनु -कायिक, वाचिक, मानसिक, पाप की निवृति के लिए भी व्यक्ति को गौ का दान करना चाहिये.10. -गाय उसी ब्राह्मण को दान देना चाहिये जो वास्तव में गाय को पाले, उसकी रक्षा करे, सेवा करे.अन्यथा गौदान करने पर गौ माता यदि दुखी रहती है, तो हमारा गौ दान करना व्यर्थ है.11.-जो दस गौए और एक बैल दान करता हैतो छोडा हुआ सांड अपनी पूँछ से जो जल फेकता है, वह एक हजार वर्षों तक पितरो के लिए तर्प्तिदायक होता है, सांड या गाय के जितने रोएँ होते है उतने हजार वर्षों तक मनुष्य स्वर्ग में सुख भोगता है.

🌹श्याम सुन्दर गोस्वामी🌹

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