साधना संबंधी श्री महाराज जी द्वारा बताई गयी पाँच प्रमुख बातें-
👉 (१)
वे सदा हमारे हृदय में रहते है नोट करते है (चलते-फिरते खाते-पीते कही भी रहते यह रीयलाइज़ करो
महसूस करो वह हमारे हृदय में है और हमारे एक-एक संकल्प को नोट करते है)
👉 (२)
रूपध्यान का अभ्यास करे (यह अकेले की साधना है)
👉 (३)
अनन्यता (हम केवल राधा कृष्ण की ही उपासना करें, केवल अपने गुरु की ही जो प्रणाली है, जो सिद्धांत है उसका पालन करें)
👉 (४)
निष्कामता (माँगना नही है कुछ चाहे प्राण निकल रहे हों)
👉 (५)
उनके मिलन की व्याकुलता (बाकी सब जब हो जाए तो बस इसी पर ध्यान दो)
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आरती माधुरी पद संख्या २ युगल सरकार की आरती आरती प्रीतम , प्यारी की , कि बनवारी नथवारी की । दुहुँन सिर कनक - मुकुट झलकै , दुहुँन श्रुति कुंडल भल हलकै , दुहुँन दृग प्रेम - सुधा छलकै , चसीले बैन , रसीले नैन , गँसीले सैन , दुहुँन मैनन मनहारी की । दुहुँनि दृग - चितवनि पर वारी , दुहुँनि लट - लटकनि छवि न्यारी , दुहुँनि भौं - मटकनि अति प्यारी , रसन मुखपान , हँसन मुसकान , दशन - दमकान , ...
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राधे राधे ।