स्कंदपुराण मे लिखा है की एक बार भगवान की 16000 रानियां यमुना पटरानी के पास गयी ओर यमुना जी से बोली की कृष्ण के जाने के बाद हम सबको बहुत विरह है लेकिन आप खुश क्यो है??- यमुना ने उत्तर दिया की मैने कृष्ण की आत्मा यानि राधा की दासता शुरु कर दी है ईसलिए मुझे कृष्ण के जाने का विरह होता ही नही बल्कि मुझे तो कृष्ण के पास होने का ही एहसास होता है ईसलिए आप सब भी राधिका की दासता करो- कृष्ण विरह नही होगा-- श्री राधे :)
आरती माधुरी पद संख्या २ युगल सरकार की आरती आरती प्रीतम , प्यारी की , कि बनवारी नथवारी की । दुहुँन सिर कनक - मुकुट झलकै , दुहुँन श्रुति कुंडल भल हलकै , दुहुँन दृग प्रेम - सुधा छलकै , चसीले बैन , रसीले नैन , गँसीले सैन , दुहुँन मैनन मनहारी की । दुहुँनि दृग - चितवनि पर वारी , दुहुँनि लट - लटकनि छवि न्यारी , दुहुँनि भौं - मटकनि अति प्यारी , रसन मुखपान , हँसन मुसकान , दशन - दमकान , ...
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राधे राधे ।