राधे राधे,,श्री प्रियाजी के महावर से युक्त सुकोमल दोनों चरणारविन्द अद्भुत ,निर्मल और अनुपम हैं,,श्री प्रियाजी के चरण-कमल श्री श्यामसुन्दर के हृदय-रुपी कमल-कलिका को विकसित करने वाले सूर्य हैं,,सुंदर कोमल,मनोहर,और आनन्द के पारावार श्री श्यामा जू के ये चरणारविन्द निकुन्ज-वीथी के सुंदर श्रृंगार हैं..समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाले होने के कारण अनन्य रसिक-सखी-सहचरी के लिए तो श्री प्यारी जू के चरण-कमल स्वयं कल्प-वृक्ष हैं,,कामधेनु हैं,,चिंतामणी हैं,,सब कुछ हैं...
''जावक जुत जुग चरन लली के |
अद्भुत अमल अनूप दिवाकर,मोहन मानस कंज कली के ||
मंजुल मृदुल मनोहर सुखिनिधि,सुभग सिंगार निकुंज गली के |
सुरतरु कामधेनु चिंतामनि,भगवतरसिक अनन्य अली के ||..जय श्री राधे ..
आरती माधुरी पद संख्या २ युगल सरकार की आरती आरती प्रीतम , प्यारी की , कि बनवारी नथवारी की । दुहुँन सिर कनक - मुकुट झलकै , दुहुँन श्रुति कुंडल भल हलकै , दुहुँन दृग प्रेम - सुधा छलकै , चसीले बैन , रसीले नैन , गँसीले सैन , दुहुँन मैनन मनहारी की । दुहुँनि दृग - चितवनि पर वारी , दुहुँनि लट - लटकनि छवि न्यारी , दुहुँनि भौं - मटकनि अति प्यारी , रसन मुखपान , हँसन मुसकान , दशन - दमकान , ...
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राधे राधे ।