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अद्भुत बाल लीला

अद्भुत बाल लीला
एक बार जब मेरे प्रभु लीला कर रहे तो ब्रम्हा , इंद्र , शिव , ये सब देवता ठाकुर जी के निकट आए और इन्होंने क्या देखा की ठाकुर जी अपने पीछे कुछ छुपा रहे है तब देवता बोले की प्यारे आप क्या छुपा रहे हो ? तो भगवान चुपचाप खड़े है , हाथ में एक पात्र रखा है और उसको पीछे छुपा रखा है ।
देवताओ ने फिर पूछो प्रभु आप क्या छुपा रहे हो तो भगवान धीरे से बोले की देखो आप किसी को बताना नहीं ये जो पात्र है ना यामे बड़ी मुश्किल से आज में कहीं से छाछ लेकर आयो हूँ तो देवता बोले की फिर प्रभु छुपा क्यों रहे हो क्या ये बहुत कीमती है ?
भगवान बोले अब इसकी कीमत में क्या बताऊँ ? तो देवता बोले की प्रभु जब आप , जो अनंत कोटि ब्रम्हाण्ड नायक है ,आप इस छाछ को छुपा रहे है तो ये तो अनमोल होगी तो प्यारे एक घूंट हमे भी मिल जाए , आप कृपा कर दो ताकि एक घूंट हम भी पी सके तो भगवान बोले की नहीं-नहीं देवताओ ये छाछ तुम्हारे सौभागय में नहीं है ,तुम स्वर्ग का अमृत पी सकते हो पर ब्रजवासियो की छाछ तो में ही पिऊँगा ,तुम जाओ यहाँ से स्वर्ग का अमृत पीओ पर ये छाछ में आपको नहीं दे सकता हूँ
तो देवता बोले प्रभु ऐसी कौनसी अनमोल बात है इस छाछ में जो हम नहीं पी सकते है , आप कह रहे हो की हम अमृत पिये तो क्या ये छाछ अमृत से भी बढ़कर है ?
अरे छाछ तो छाछ है इसमें क्या बड़ी बात है तो ठाकुर जी आँखों में आँसू भरकर बोले की देवताओ तुम्हे नाय पतो या छाछ कू पाने के लिए मोए गोपिन की सामने नृत्य करनो पड़े है , जब में नाचूँ हूँ तब मोकुं ये छाछ मिले है

" की ताहि अहीर की छोहरियाँ
छछिया भर छाछ पर नाच नचावे "

तो कुछ तो बात होगी ही ना क्योंकि इसे पाने के लिए ठाकुर जी को नाचना पडता है ।
बड़ी अद्भुत बाल लीला -- आचार्य गौरव कृष्ण गोस्वामी जी

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