( कृष्ण चरण महिमा)
★ भागवत के माहात्म मे भक्ति महारानी के दूख को दुर करने के लिए भक्ति महारानी के माध्यम से नारद जी सम्पुर्ण विश्व को एक सूत्र देते हुए कहते है की---" श्रीकृष्णचरणाम्भोजं स्मर दूखं गमिष्यति"-- अर्थात् श्री कृष्ण के चरणो का स्मरण करने मात्र से ही दूख चला जाता है-- क्योकि भगवान का सम्पुर्ण स्वरुप आनंदमय है ओर जब मन उस आनंद रुप कृष्ण के आनंदरुप चरणो का स्मरण करेगा तो मन को शांति मिलती है ओर सारा दूख चला जाता है--ईसलिए नारद जी सबको सूत्र देते हुए कहते है की " "श्रीकृष्णचरणाम्भोजं स्मर दुखं गमिष्यति"-ईसलिए भगवान के स्वरुप का ओर चरणो का बारंबार स्मरण करना चाहिए-- चरणो से लेकर मुख तक सम्पुर्ण स्वरुप का ध्यान करने से भगवान मे प्रीति बढती है-- बोलिए श्रीमद्भागवत महापुराण की जय--श्री राधे
आरती माधुरी पद संख्या २ युगल सरकार की आरती आरती प्रीतम , प्यारी की , कि बनवारी नथवारी की । दुहुँन सिर कनक - मुकुट झलकै , दुहुँन श्रुति कुंडल भल हलकै , दुहुँन दृग प्रेम - सुधा छलकै , चसीले बैन , रसीले नैन , गँसीले सैन , दुहुँन मैनन मनहारी की । दुहुँनि दृग - चितवनि पर वारी , दुहुँनि लट - लटकनि छवि न्यारी , दुहुँनि भौं - मटकनि अति प्यारी , रसन मुखपान , हँसन मुसकान , दशन - दमकान , ...
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राधे राधे ।